2019 कृष्ण जन्माष्टमी कब है, जन्माष्टमी क्यों मानते हैं। श्री कृष्ण की कहानी। krishna janmashtami | story of shree krishna | krishna janmashtami pray |
जन्माष्टमी
Janmashtami 2019: इस बार दो दिन मनाई जाएगी जन्माष्टमी, जानिए किस दिन रखें व्रत
Janmashtami 2019: इस बार अष्टमी
23 अगस्त को पड़ रही है जबकि रोहिणी नक्षत्र
इसके अगले दिन यानी कि 24 अगस्त को है. कुल
मिलाकर इस बार अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का
संयोग नहीं हो पा रहा है
हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु जी के पूर्णावतार को ही भगवान श्रीकृष्ण के रूप माना और उनकी पूजा होती हैं। मान्यता है कि भगवान कृष्ण मानव जीवन के सभी चक्रों (यानि जन्म, मृत्यु, शोक, खुशी आदि) से गुजरे हैं, इसीलिए उन्हें पूर्णावतार कहा जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी (Janmashtami) तिथि को मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था।
भगवान श्री कृष्ण की कहानी | Story of Lord Krishna in Hindi
हमारी प्राचीन कहानियों का सौंदर्य यह है कि वे कभी भी विशेष स्थान या विशेष समय पर नहीं बनाई गई हैं। रामायण या महाभारत प्राचीन काल में घटी घटनाएं मात्र नहीं हैं। ये हमारे जीवन में रोज घटती हैं। इन कहानियों का सार शाश्वत है। श्री कृष्ण जन्म की कहानी का भी गूढ़ अर्थ है। इस कहानी में देवकी शरीर की प्रतीक हैं और वासुदेव जीवन शक्ति अर्थात प्राण के। जब शरीर प्राण धारण करता है, तो आनंद अर्थात श्री कृष्ण का जन्म होता है। लेकिन अहंकार (कंस) आनंद को खत्म करने का प्रयास करता है। यहाँ देवकी का भाई कंस यह दर्शाता है कि शरीर के साथ-साथ अहंकार का भी अस्तित्व होता है। एक प्रसन्न एवं आनंदचित्त व्यक्ति कभी किसी के लिए समस्याएं नहीं खड़ी करता है, परन्तु दुखी और भावनात्मक रूप से घायल व्यक्ति अक्सर दूसरों को घायल करते हैं, या उनकी राह में अवरोध पैदा करते हैं। जिस व्यक्ति को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, वह अपने अहंकार के कारण दूसरों के साथ भी अन्यायपूर्ण व्यवहार करता है। अहंकार का सबसे बड़ा शत्रु आनंद है। जहाँ आनंद और प्रेम है वहां अहंकार टिक नहीं सकता, उसे झुकना ही पड़ता है। समाज में एक बहुत ही उच्च स्थान पर विराजमान व्यक्ति को भी अपने छोटे बच्चे के सामने झुकना पड़ जाता है। जब बच्चा बीमार हो, तो कितना भी मजबूत व्यक्ति हो, वह थोडा असहाय महसूस करने ही लगता है। प्रेम, सादगी और आनंद के साथ सामना होने पर अहंकार स्वतः ही आसानी से ओझल होने लगता है । श्री कृष्ण आनंद के प्रतीक हैं, सादगी के सार हैं और प्रेम के स्रोत हैं। कंस के द्वारा देवकी और वासुदेव को कारावास में डालना इस बात का सूचक है कि जब अहंकार बढ जाता है तब शरीर एक जेल की तरह हो जाता है। जब श्री कृष्ण का जन्म हुआ था, जेल के पहरेदार सो गये थे। यहां पहरेदार वह इन्द्रियां है जो अहंकार की रक्षा कर रही हैं क्योंकि जब वह जागता है तो बहिर्मुखी हो जाता है। जब यह इन्द्रियां अंतर्मुखी होती हैं तब हमारे भीतर आंतरिक आनंद का उदय होता है।
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Reviewed by Dudidudex
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August 22, 2019
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